Sunday, 16 August 2015

दिल के जज्बातों कों दिल मे ही छिपा लेते है हम ..............





दिल के जज्बातों कों दिल मे ही छिपा लेते है हम ,

अपने इन आंसू कों खुद की पलकों मैं ही छिपा लेते है हम l

बस एक ही गिला है इन आसुओ से मेरी ए दोस्त ,

की ना बहना इन आँखों से ए मेरे दोस्त l


क्या पता मेरे ये आंसू कर जाए किसी अपने की आँखे नम ll

No comments:

Post a Comment