Saturday, 29 August 2015

खतरों से खेलने का शोक है हमे , वरना तूफ़ान मैं कश्ती हम ना चलाते........................




खतरों से खेलने का शोक है हमे ,

वरना तूफ़ान मैं कश्ती हम ना चलाते l

जज्बा है कुछ कर दिखाने का,

वरना कश्ती तूफ़ान से पार ना लाते l

जो डगमगा जाते कदम मेरे तूफ़ान कों देख कर,

तोह शायद हम कश्ती मैं बैठे ही लडखडाते,

तोह खुद कैसे तूफ़ान से बहार लाते  l

खतरों से खेलने का शोक है हमे,


वरना तूफ़ान मैं कश्ती हम ना चलाते ll

No comments:

Post a Comment